प्रमाणपत्र गलत मिला तो रद्द होगी नियुक्ति:- 2019 में बना था ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र, बेसिक शिक्षा मंत्री जी के भाई से दोबारा मांगा जाएगा सर्टिफिकेट

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सिद्धार्थनगर। 2019 का आर्थिक आरक्षण का प्रमाणपत्र लगाकर असिस्टेंट प्रोफेसर बने अरुण द्विवेदी से कुलपति ने ईडब्ल्यूएस का नया प्रमाणपत्र मांगा है। वैध प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराने पर उनकी नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी।

अरुण की नियुक्ति के बाद जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षीओं ने
सवाल उठाए हैं। ईडब्ल्यूएस का पुराना प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी हासिल करने पर सोशल मीडिया में दो दिनों से यह मुद्दा छाया हुआ है। जानकारी मिली है कि राजभवन ने भी सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा है। बताया जा रहा है कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के मनोविज्ञान विभाग में वर्ष 2019 में विज्ञापन प्रकाशित हुआ था।

आवेदकों ने उस समय अंकपत्रों एवं अन्य दस्तावेजों के साथ ईडब्ल्यूएस (सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आरक्षण) कोटे के अंतर्गत प्रमाण पत्र जमा किए थे।

विश्वविद्यालय के अनुसार आवेदन पत्र में आवेदकों ने जो दस्तावेज जमा किए थे, उसके आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई। नियम के अनुसार आर्थिक आरक्षण का प्रमाणपत्र एक वर्ष के लिए ही वैध होता है, इसके बावजूद अंतिम चयन प्रक्रिया में चयनित होने के बाद बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी से वर्तमान समय का प्रमाण पत्र नहीं मांगा गया, जबकि, नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाने वालों का दावा है कि वर्ष 2021 में अरुण की हैसियत बढ़ गई हैं और वे ईडब्ल्यूएस कोटे से बाहर हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अरुण द्विवेदी ने वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर पद से हाल ही में इस्तीफा दिया है, जबकि उनकी पत्नी विदुषी दीक्षित बिहार के एक विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इस बाबत सिद्धार्थ विवि के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने बताया कि मनोविज्ञान विभाग में ईडब्ल्यूएस कोटे के अंतर्गत चयनित अरुण की नियुक्ति के मामले में फिलहाल राजभवन से कोई पत्र नहीं मिला है।

विज्ञापन की अंतिम तिथि से पहले जमा हुए आवेदन में आवेदकों ने दस्तावेज लगाए थे, उसके आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई है। इस मामले में अरुण द्विवेदी से पुनः ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र मांगा जाएगा। यदि वे वर्तमान समय का प्रमाण पत्र नहीं जमा करेंगे तो नियुक्ति निरस्त कर दी जाएगी।